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Sherdil: The Pilibhit Saga Movie Review | पंकज त्रिपाठी के कंधों पर टिकी ये फिल्म देती है अहम संदेश

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शेरदिल: द पीलीभीत सागा (Photo Credits: Instagram)

फिल्म की कहानी गंगाराम नाम के एक ऐसे व्यक्ति के इर्दगिर्द घूमती है जो अपने गांव का सरपंच है. गांव में भुखमरी के चलते बढ़ते आत्महत्या के मामलों से परेशान गंगाराम एक ऐसी तरकीब खोज निकालता है जहां उसके प्राणों के बलिदान के बदले उसे 10 लाख रूपए मिलेंगे

फिल्म: शेरदिल: द पीलीभीत सागा 

कास्ट: पंकज त्रिपाठी,सयानी गुप्ता और नीरज कबी

निर्देशक: श्रीजीत मुखर्जी 

रेटिंग्स: 3 स्टार्स 

कहानी: फिल्म की कहानी गंगाराम नाम के एक ऐसे व्यक्ति के इर्दगिर्द घूमती है जो अपने गांव का सरपंच है. गांव में भुखमरी के चलते बढ़ते आत्महत्या के मामलों से परेशान गंगाराम एक ऐसी तरकीब खोज निकालता है जहां उसके प्राणों के बलिदान के बदले उसे 10 लाख रूपए मिलेंगे और उससे वो अपने छोटे से लेकिन लाचार गांव की समस्या को दूर कर सकेगा. सरकारी स्कीम के अनुसार खेती करते समय अगर किसी व्यक्ति की जांच बाघ ले लेता है तो उसे मुआवजे के रूप में 10 लाख रूपए मिलेंगे. इसी स्कीम को पाने के चक्कर में गंगाराम तमाम जोखिम उठाता है और ये कहानी रोमांचक रूप लेती है.

अभिनय: जैसा कि इस फिल्म समीक्षा का शीर्षक है, ये फिल्म पंकज त्रिपाठी के कंधों पर टिकी हुई है. उनके किरदार में कॉमेडी, गंभीरता और चिंता, ये सारे भाव हैं जिसे वो बखूभी निभाते नजर आए. उनके अलावा सयानी गुप्ता ने भी गंगाराम की पत्नी की बेहद दमदार तरीके से भूमिका निभाई है. जिम अहमद नाम के शिकारी के किरदार में नीरज कभी बेहद जचते नजर आए. उनके अंदाज और उनका लुक भी यहां काफी अलग है और ये उसे और भी दिलचस्प बनाता है.

म्यूजिक: कहानी में विकट परिस्थिति में घिरे गंगाराम की दास्तां को इसके गाने बेहद उम्दा तरीके से बयां करते हैं. इसके गानों के बोल हमारे समाज की व्यथा और सच्चाई को दर्शाते और ये सीन्स में मानों जान डाल देते हैं.

फाइनल टेक: ये फिल्म 2017 में पीलीभीत नाम की जगह से प्रेरित सच्ची घटना पर आधारित है. फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह से दुनियाभर में अपना डंका बजा रहे इस देश का एक तबका ऐसा भी है जो केवल 2 वक्त के खाने के लिए इतना लाचार हो चूका है कि जंगली शेर के आगे कूदकर आत्महत्या करने को ही सही मान रहा है ताकि सरकार मुआवजे का फायदा उठाकर वो अपने परिवार को भुखमरी से बचा ले. फिल्म की कहानी अहम है लेकिन इसके कई ऐसे सीन्स हैं जिन्हें जरूरत से ज्यादा खींच दिया गया इही. यही इसे कुछ जगहों पर बोरियत से भर देती है. कहानी का संदेश अहम है लेकिन इसका लेखन कमजोर है जो इसकी सबसे बड़ी कमी भी है. पंकज त्रिपाठी के शानदार अभिनय के चलते ये फिल्म दिलचस्प नजर आती है.

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