Odd Couple Review | आधुनिक युग में उलझे हुए रिश्तों की कहानी बयान करती हैं सादगी और मनोरंजन से भरी ये सीरीज

ऑड कपल (Photo Credits: Instagram)

ये कहानी दो ऐसे कपल्स की है जिनकी उम्र में करीब 15 साल का फासला है. बर्लिन से हाल ही में वापस लौटे योगेश एक 40 वर्षीय प्रसिद्ध चित्रकार हैं और निवेदिता एक 39 वर्षीय इंटरप्रेटर हैं जो अपने फ्लैट नंबर 404 में अकेली रहती हैं…

शो: ऑड कपल 

जॉनर: वेब सीरीज

कास्ट: विजय राज, दिव्येंदु शर्मा, प्रणति राय प्रकाश और सुचित्रा कृष्णमूर्ति

निर्देशक: प्रशांत जोहरी 

कहां देखें: अमेजन प्राइम वीडियो

रेटिंग्स: 3 स्टार्स 

कहानी: ये कहानी दो ऐसे कपल्स की है जिनकी उम्र में करीब 15 साल का फासला है. बर्लिन से हाल ही में वापस लौटे योगेश एक 40 वर्षीय प्रसिद्ध चित्रकार हैं और निवेदिता एक 39 वर्षीय इंटरप्रेटर हैं जो अपने फ्लैट नंबर 404 में अकेली रहती हैं. दूसरा जोड़ा 25 वर्षीय पीयूष एक सामाजिक उद्यमी है और उसकी प्रेमिका नवी, 24 साल की एक ऐसी लड़की है जो आजादी से जीवन जीने में विश्वास रखती है. वे दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में हैं और एक ही बिल्डिंग के फ्लैट नंबर 304 में रहते हैं। एक दिन, दोनों जोड़े अपने कारणों के चलते शादी करने का फैसला करते हैं लेकिन किसी तरह नाम और पते में हुई गड़बड़ी के कारण विवाह रजिस्ट्रार कार्यालय में उनकी शादी का आदान-प्रदान हो जाता है. दंपति का अधिकारियों से झगड़ा हो जाता है और वे (रजिस्ट्रार) नामों को सही करने की दलील को खारिज कर देते हैं. बाद में, एक मूल्यवान सुझाव के आधार पर, वे एक वर्ष के बाद तलाक लेने के बाद अपने असली पार्टनर्स से पुनर्विवाह करने का निर्णय लेते हैं.

अभिनय: शो में दिव्येंदु शर्मा एक बार फिर दर्शकों को इम्प्रेस करते नजर आते हैं. शो में उनका रोल बेहद दिलचस्प है और ये हमें खूब एंटरटेन करता है. विजय राज भी हमेशा की तरह अपने गंभीर और इंटेंस अंदाज से भी खूब मनोरंजन करते नजर आए. शो में प्रणति राया प्रकाश भी काफी हद तक इम्प्रेस करती हैं.

फाइनल टेक: ये बेहद अनोखी कहानी है, जिसे व लेखक निर्देशक प्रकाश जौहरी द्वारा वास्तविक तरीके से पेश किया गया है. ये शो हमें भारत के शहरों में लोगों की कहानियों से संबंधित रोजमर्रा के दृश्य दिखाती है. इसके किरदार समाज के एक ऐसे सेक्शन को रिप्रेजेंट करते हैं जो आत्मनिर्भर, विशेषाधिकार प्राप्त और स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं. ये कहानी उन लोगों की जद्दोजहद को दर्शाती है जो दूसरों गांव-शहरों से मुंबई जैसे बड़े शहर में आजीविका कमाने और करियर बनाने के लिए आते हैं. इसमें एक जोड़ा और आजाद लिव-इन पार्टनर हैं, जो सरलता से लैंगिक रूढ़ियों को लांघते हैं. सुचित्रा कृष्णमूर्ति को लंबे समय के बाद देखना रिफ्रेशिंग है. वह एक व्यवस्थित और स्वतंत्र शहरी महिला के रूप में तुरंत पसंद की जाती है, जो उनकी वास्तविकता से मेल खाती है. दिव्येंदु शर्मा अपने बिहारी लहजे से दिल जीत लेते हैं. एक दिलचस्प शुरुआत के बाद, इसके स्क्रीनप्ले का अनुमान लगाया जा सकता है. शो एक सुस्त गति के साथ आगे बढ़ती है जिसमें कुछ अनावश्यक चरित्र और सबप्लॉट शामिल है. इसमें कुछ हद तक मेलोड्रामा है और ये हमारे समाज में होने वाली गलतियों पर ज्ञान नहीं देता है.

 

 

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