रूस की कोरोना वैक्सीन पर WHO ने मांगा प्रूफ

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रूस की कोरोना वैक्सीन पर WHO ने मांगा प्रूफ

तमाम देशों और WHO के सवालों के बीच रूस ने अपने कोरोना वायरस वैक्सीन Sputnik-V का उत्पादन काफी बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया है। रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने उम्मीद जताई है कि इस वैक्सीन का पहला बैच दो सप्ताह के अंदर बाजार में आ जाएगा। रूसी कंपनी सिस्तेमा ने बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन शुरू किया है। उन्होंने कहा कि कोरोनो वायरस से बचाव करने वाला यह टीका अभी स्वास्थ्य कर्मियों सहित सभी लोगों के लिए स्वैच्छिक होगा। इसे अनिवार्य नहीं किया जाएगा। अक्टूबर से इस वैक्सीन को बड़े पैमाने पर लोगों को लगाया जाएगा। मिखाइल मुराशको ने कहा कि रूस अपने नागरिकों के स्वास्थ्य के बारे में पता लगाने के लिए एक स्पेशल ट्रेसिंग ऐप विकसित कर रहा है। यह ऐप कोरोना की वैक्सीन लगवाने वाले लोगों के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों पर नजर रखेगा। रूस ने इस वैक्सीन का नाम अपने पहले सैटेलाइट स्पुतनिक वी (Sputnik-V) के नाम पर रखा है।                                                                                                 

हालांकि, रूस की कोरोना वैक्सीन Sputnik-V पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सहित अमेरिका, जर्मनी समेत कई देशों ने सवाल उठाए हैं। WHO ने रूस से Sputnik-V के सफल ट्रायल और कोरोना की रोकथाम में इसके प्रभावी होने का सबूत मांगा है। WHO का कहना है कि उसके पास अभी तक रूस के कोरोना वैक्सीन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता तारिक जसारेविक ने कहा कि वो दुनिया के पहले संभावित कोविड-19 वैक्सीन की प्री-क्वालिफिकेशन को लेकर रूस के साथ संपर्क में हैं। तारिक ने एक वर्चुअल प्रेस ब्रीफिंग में कहा, हम इस वैक्सीन को लेकर रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं और डब्ल्यूएचओ द्वारा वैक्सीन के संभावित प्री-क्वॉलिफिकेशन के बारे में चर्चा चल रही है। इसमें वैक्सीन की प्री-क्वॉलिफिकेशन में क्लिनिकल परीक्षणों के दौरान सुरक्षा और उसके प्रभाव के लिए आवश्यक सभी डेटा की कठोर समीक्षा और मूल्यांकन शामिल है।

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