IIM Director Bhimaraya Metri | बदलती व्यापारिक चुनौतियों से लड़ना सीखा रहा नागपुर IIM, हो रहा नई कल्पनाशील ‘वर्क फाॅर्स’ का सृजन

नई दिल्‍ली/नागपुर. जहाँ एक तरफ आज विश्व में सभी चीज़े बदल रही हैं। वहीं इस व्यापक बदलाव से शिक्षा क्षेत्र भी अछुता नहीं है। इस अहम बदलाव के चलते वर्तमान परिदृश्य में हमें आज की पीढ़ी को अनेक ‘अदृश्य परिस्थियों’ के लिया तैयार करना जरुरी है। ताकि वे देश के उद्योग क्रान्ति को नयी ऊँची दिशाओं के तरफ अग्रसर कर सकें।

इसके लिए आज की नयी पीढ़ी में आनेवाली चुनौतियों का आकलन और साथ ही उनका समुचित मूल्यांकन करने की समझ पैदा करना नितांत जरुरी है। कुछ ऐसे ही अनमोल विचार IIM नागपुर के प्रबंध निदेशक भीमराया मैत्री ने ‘नवभारत’ के साथ एक वैचारिक मंच पर  साझा किये।

नए लर्नर तेजी से सीख रहे चुनौतियों का सामना करना 

दरअसल बीते मंगलवार को ‘नवभारत’ पहुंचे मैत्री, संपादकीय सहयोगियों से हो रही चर्चा में कहा कि, वर्तमान दौर में आज के नए लर्नर तेजी से चुनौतियों का सामना कर आगे बढ़ रहे हैं। वे अपनी कल्पनाओं की शक्ति से अब और भी ज्यादा आगे की सोच रहे हैं। हालाँकि ये सच है कि, वर्तमान परिद्रश्य में नयी कंपनियां आज की पुरानी  कंपनियों के लिए चुनौतियां खड़ी कर रही है। इसका जीवंत उदाहरण गूगल और टेस्ला जैसी नयी कंपनियां है, जो सालों पुरानी कंपनियों जैसे माइक्रोसॉफ्ट के लिए अब चुनौती बन चुकी है। वजह साफ़ है कि वे अपने कल्पना शक्ति से आज सफलता के नए आयामों को छु रहे हैं। 

ग्लोबल विजन बहुत जरुरी 

चूँकि आज पूरी दुनिया एक ग्लोबल विलेज बनकर रह गई है। ऐसे में तेजी से बदलती दुनिया में छात्रों को ग्लोबल विजन के साथ तैयार करना ही IIM का मुख्य कार्य है। अब आज के छात्र अपने कल्पना शक्ति के चलते ‘फियरलेस जॉब’ करने इस कदर तैयार होते हैं कि वे अपने साथ-साथ कंपनियों को भी ऊंचाइयों पर ले जाते हैं।

विदर्भ के किसानों कि तकलीफ भी होगी दूर 

विदर्भ के किसानों के कठनाइयों पर भीमराया मैत्री ने कहा कि, आज जो किसान ‘कोऑपरेटिव’ के तौर से काम कर रहे हैं, वे अत्यधिक खुशहाल हैं।अंगूर, गन्ना उत्पादक अब एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं लेकिन विदर्भ में फिलहाल ऐसे साझापन का अभाव है। वे अभी अलग-अलग काम कर रहे हैं, जिसके चलते परिणाम उतने सकारात्मक नहीं मिल रहे और इससे बढती हताशा के चलते अब इनके द्वारा आत्महत्याएं हो रही हैं। 

नए चुनौतियों के चलते अब किसानों को ‘प्रोसेसिंग’ पर भी ध्यान देना होगा ताकि अधिक मूल्य मिल सके। वहीं IIM जल्द ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को क्रियान्वित करने जा रहा है।इसके लिए अब IIM के सेंटर फॉर एक्सीलेंस पर एग्रीकल्चर को भी मान्यता भी दी गई है, जिसके तहत इसके लिए जरुरी रिसर्च कार्य किए जाएंगे।

IIM से होगा नागपुर का नाम रोशन

इसके साथ ही उन्होंने IIM के नागपुर में होने के लाभों को लेकर कहा कि, यहाँ से पास आउट किये हुए छात्र आज जहां भी जाएंगे, वहां-वहां नागपुर का ही नाम रोशन करेंगे।वैसे भी आज जिन स्थानों पर IIM, IIT जैसे बड़े इंस्टिट्यूट होते हैं, उस शहर की पहचान ग्लोबल स्तर तक हो जाती है, क्योंकि यहाँ फिर विद्यार्जन के लिए इंटरनेशनल छात्र भी आते रहते हैं। इसके साथ ही कार्यक्रम के संपन में उन्होंने कहा कि, नागपुर में कई विशेषताएं हैं जो शहर को ग्लोबल बनाने में कारगर है।हालाँकि इसमें सबसे बड़ी कमी इस बाबत किसी ख़ास रिसर्च सेंटर का नहीं होना है। लेकिन अगर यहाँ रिसर्च एंड इनोवेशन का स्तर ऊँचा हुआ  तो जल्द ही यह कमी भी दूर होगी। इस बाबत यहाँ IIM में रिसर्च एंड इनोवेशन पार्क भी जल्द शुरू होगा। 

 

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