Stock Market | शेयर बाजार में मंदी खत्म होने के संकेत

  • 49,500 अंक मजबूत समर्थन स्तर सेंसेक्स के लिए

मुंबई: पिछले डेढ़ साल रिकॉर्ड तेजी के बाद वैश्विक बाजारों के संग अब भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में भी मंदी गहराती जा रही है और मंदी का यह दौर विगत 5 महीनों से जारी है। इस दौरान दोनों मुख्य बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) और एनएसई निफ्टी (NSE Nifty) 18% से अधिक टूट चुके हैं। सेंसेक्स ने जहां 62,245 अंक के सर्वोच्च स्तर से गिरकर 50,921 अंक को छू लिया है, वहीं निफ्टी अपने सर्वोच्च स्तर 18,604 से घटते हुए 15,193 अंक तक गिर चुका है। जबकि बाजार का व्यापक रूख दर्शाने वाले सूचकांकों मिडकैप (BSE MidCap) और स्मालकैप (BSE SmallCap) में 23.7% तक की मंदी आ चुकी है। बीते सप्ताह ज्यादा मंदी आने का मुख्य कारण अमेरिका (US) में महंगाई दर (Inflation Rate) 40 वर्षों की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद वहां के केंद्रीय बैंक (US Federal Reserve) द्वारा अपनी ब्याज दर (Interest Rate) में 0.75% की बड़ी वृद्धि किया जाना रही।

 विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के अन्य सभी फैक्टर पॉजिटिव हैं। इतिहास में पहली बार घरेलू निवेशकों (Domestic Investors) का दबदबा बढ़ता दिख रहा है। अप्रैल-जून तिमाही के एडवांस टैक्स संग्रह (Advance Tax Collection) में 33% की अच्छी वृद्धि होना इस बात का संकेत है कि कार्पोरेट इंडिया (Corporate India) के जून तिमाही के रिजल्ट कुल मिलाकर अच्छे रहेंगे। स्टील-मेटल, वेजिटेबल ऑयल तथा अन्य कमोडिटीज के दाम (Commodities Prices) 15 से 44% घट गए हैं। सिर्फ चिंता है क्रूड ऑयल (Crude Oil) की रिकॉर्ड महंगाई तथा बढ़ती ब्याज दरें हैं, लेकिन अब क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट शुरू होने से यह चिंता दूर होने की उम्मीद जगी है। शुक्रवार को क्रूड ऑयल में 7% की बड़ी गिरावट देखने को मिली। हालांकि मानसून में देरी भी कुछ चिंता पैदा कर सकती है, परंतु भारतीय बाजार में मंदी का दौर समाप्ति की ओर है और 5% या 8% से ज्यादा गिरावट आने की आशंका नहीं है। यानी सेंसेक्स के लिए 49,500 अंक और निफ्टी के लिए 14,500 अंक बड़ा समर्थन स्तर है।     

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इंडियन इकोनॉमी में अभी तक तेजी कायम: आलोक रंजन

IDBI म्यूचुअल फंड (IDBI Mutual Fund) के मुख्य निवेश अधिकारी आलोक रंजन (Alok Ranjan) का कहना है कि जब तक रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म नहीं होता है और क्रूड ऑयल की कीमत नहीं घटती है, महंगाई बढ़ने की आशंका बनी रहेगी और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि करने का डर बना रहेगा। इससे जीडीपी ग्रोथ प्रभावित होने की आशंका पैदा होगी। लिहाजा ऐसे हालात में बाजार में मंदी का दबाव बना रहेगा। राहत की बात यह है कि इंडियन इकोनॉमी में अभी तक मंदी के संकेत नहीं है। जून तिमाही के कार्पोरेट एडवांस टैक्स में 33% वृद्धि के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं। दूसरी राहत की बात यह है कि क्रूड ऑयल को छोड़ अन्य सभी कमोडिटीज कीमतों में कुछ गिरावट आई है। जिसका असर आगामी दो महीनों के महंगाई के आंकड़ों (Inflation Figures) में दिखाई देना शुरू हो जाएगा, यदि अब क्रूड ऑयल भी 100 डॉलर के नीचे आ जाता है तो बाजार के लिए बड़ा पॉजिटिव होगा।

उचित स्तर पर आने लगा है बाजार

आलोक रंजन ने कहा कि गिरावट के बाद भारतीय बाजार उचित स्तर पर आने लगा है। बैंकिंग, आईटी, फार्मा, ऑटो जैसे कुछ सेक्टर तो उचित स्तरों पर आ गए हैं। अब 5 से 7% और गिरावट के बाद बाजार का वैल्यूएशन (Valuation) आकर्षक दिखने लगेगा। तब लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट व्यू (Long Term Investment View) के साथ निचले स्तरों पर निवेश शुरू करना सही होगा। जो निवेशक एसआईपी (SIP) के माध्यम से निवेश कर रहे हैं, उन्हें अपना निवेश जारी रखना चाहिए। इंडियन इकोनॉमी के पॉजिटिव फैक्टर्स को देखते हुए फंडामेंटली मजबूत शेयरों को ‘पैनिक’ में आकर घाटे में बेचने की जल्दबाजी करना सही नहीं होगा।

पहली बार दिखा भारतीय निवेशकों का ‘पावर’: राकेश मेहता

मेहता इक्विटीज (Mehta Equities Ltd.) के अध्यक्ष राकेश मेहता का कहना है कि  भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में यह पहली बार देखा जा रहा है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारी बिकवाली कर रहे हैं और फिर भी बाजार ज्यादा नहीं गिर रहा है। मजबूती दिखा रहा है। अन्यथा पहले जब भी विदेशी निवेशक भारी बिकवाली करते थे इंडेक्स 15-18% नहीं बल्कि 30-35% तक घट जाता था। वे पिछले 8 महीनों से लगातार बिकवाली कर रहे हैं। 2022 में ही अब तक विदेशी निवेशकों ने 2.67 ट्रिलियन रुपए (करीब 35 बिलियन डॉलर) की रिकॉर्ड बिकवाली (शुद्ध बिक्री) की हैं, लेकिन फिर भी सेंसेक्स सिर्फ 18% ही गिरा है। यह संभव हुआ है भारतीय निवेशकों की बढ़ती ताकत से। भारतीय संस्थागत निवेशकों (DII) ने इस साल अब तक 2.15 ट्रिलियन रुपए (28 बिलियन डॉलर) की शुद्ध खरीद की है। भारत में रिटेल और एचएनआई निवेशकों का बहुत ही अच्छा और मजबूत आधार विकसित हुआ है, जिसके कारण भारतीय म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियां विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली को आसानी से ‘एब्जॉर्ब’ कर पाने में सफल हो रहे हैं।

पहली तिमाही के नतीजों पर निगाहें

राकेश मेहता ने कहा कि हमारा मानना है, FII की बिकवाली कुछ दिन और यानी यूएस बॉन्ड यील्ड (US Bond Yield) के 4% तक पहुंचने तक जारी रह सकती है, जो अभी 11 साल की ऊंचाई 3.48% पर पहुंच गयी है। लेकिन अब अन्य सभी फैक्टर डिस्काउंट होने लगे हैं और बाजार की भावी चाल पहली तिमाही के नतीजों से तय होगी। अगले कुछ महीनों तक निफ्टी 15,000 से 17,500 अंक की रेंज में रहने की उम्मीद है। 200 से 300 अंकों की गिरावट और आने पर बाजार का मूल्यांकन आकर्षक हो जाएगा।

ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के नीचे आने का इंतजार: श्रीकांत चौहान

कोटक सिक्युरिटीज (Kotak Securities Ltd.) के रिसर्च हैड श्रीकांत चौहान का कहना है कि निवेशकों के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता बेकाबू होती महंगाई और बढ़ती ब्याज दरें हैं और मौजूदा रिकॉर्ड महंगाई का बड़ा कारण केवल अर्थतंत्र में अधिक तरलता (Excess Liquidity) नहीं है बल्कि रूस-यूक्रेन वार के कारण पैदा हुई शॉर्ट सप्लाई स्थिति (Short Supply Situation) की वजह से अधिक है, लेकिन इस पर कंट्रोल के लिए अमेरिका और अन्य सभी देशों के केंद्रीय बैंकों (Central Banks) के पास ब्याज दर वृद्धि के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। इसलिए वे आक्रामक तरीके से ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ा रहे हैं, पर इससे आर्थिक विकास प्रभावित होने की आशंका है। इस बीच, शुक्रवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में 7% की बड़ी गिरावट आना शेयर बाजार निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत की बात है। यह गिरावट अमेरिकी सरकार और तेल उत्पादक देशों के संगठन ‘ओपेक’ की आपूर्ति बढ़ाने की पहल से आई है। लगता है, अमेरिकी सरकार यह समझ गयी है कि क्रूड ऑयल की कीमतों को नीचे लाकर यदि महंगाई को कंट्रोल नहीं किया गया तो अमेरिका सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था फिर मंदी की चपेट में आ जाएगी और तब आर्थिक मंदी से जल्द उबर पाना बहुत ही मुश्किल होगा। अब यदि अमेरिका के प्रयासों से ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर के नीचे आ जाता है तो बाजार में मंदी का खतरा भी दूर होने की उम्मीद बढ़ जाएगी।

तब विदेशी निवेशकों की रूक जाएगी ‘सेलिंग’

श्रीकांत चौहान ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार की बात करें तो पेट्रोलियम उत्पादों के अलावा अन्य सभी कमोडिटीज के दाम नीचे आने लगे हैं। भारत की आर्थिक स्थिति और विकास गति औरों से अच्छी है। बैंकिंग सेक्टर भी मजबूत है, परंतु अन्य एशियाई देशों की तुलना में इंडियन मार्केट की वैल्यूएशन अभी भी थोड़ी महंगी है। निफ्टी इंडेक्स वित्त वर्ष 24 की फॉरवर्ड अर्निंग के हिसाब से 16.25 के पीई रेशियो (PE Ratio) पर ट्रेड कर रहा है। इसी कारण विदेशी निवेशक अभी भी भारत में सेलिंग (बिकवाली) कर रहे हैं। यदि 5% और गिरावट आती है तो निफ्टी 15 के पीई रेशियो पर आ जाएगा, जो काफी आकर्षक मूल्यांकन (Attractive Valuation) होगा। तब विदेशी निवेशकों की सेलिंग रूक जाएगी और खरीद भी बढ़ सकती है।

टॉप पिक : यदि अगले 6 से 12 महीनों की अवधि के लिए निवेश नजरिए से देखा जाए तो गिरते मूल्यों पर निफ्टी की टॉप कंपनियों में निवेश करना फायदेमंद हो सकता है। जिनमें रिलायंस, ICICI, SBI, HUL, ब्रिटानिया, इंफोसिस, M&M और टाटा मोटर्स सबसे आकर्षक हैं।     

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